ARCHITECTS OF THE IMAGINATION.
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विगत तीन दशकों से साहित्य की विभिन्न विधाओं में 26 पुस्तकें प्रकाशित। कविता, कहानी, गीत, ग़ज़ल, व्यंग्य, संस्मरण, नाटक, साक्षात्कार, पत्रकारिता की पुस्तकों पर प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर के सम्मान एवं पुरस्कार।
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कवयित्री की ५५ कृतियाँ कहानी, उपन्यास, समालोचना, समीक्षा, कविता, लेख, अनुवाद ,बाल साहित्य तथा संपादन में प्रकाशित हो चुकी हैं। लखनऊ कनेक्शन वर्ल्डवाइड पत्रिका की प्रधान संपादक हैं । अनेक रचनाएँ अन्य भाषाओं में अनुवादित तथा शोध हुए हैं। लगभग १३० सम्मान/ पुरस्कार प्राप्त हैं।
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I have been active in writing poems and articles since 1984. I have written more than 1000 gazals and poems in devnagari script. Three books of my poetry have been published by Nikhil publication, Agra. Name of these books are as follows- 1- lakeeron ke Darmiyan 2- khamoshi ki Dastak 3- khushboo Khayalon ki. Two books of my poetry have been published by Ink publication, Prayagraj. Name of these books are as follows- 1 - Maun jhankrat karo 2- satrangi Akash Hai Fir. These books are available on Amazon. Two books of my poetry are going to publish soon. On the other hand, Many of my gazals have been published in ' sajha sankalan of gazals'. I have been rewarded by many institutios of litrature, art and culture. In 2015, I was awarded by honourable governer of uttar pradesh shri Ram Naik and honourable governer of west Bengal shri keshri Nath Tripathi. I have recited my poems on Doordarshan and other T V channels. I have also recited my poems on All India Radio, Agra. My poems have been published in various reknowned magazines of India. I am active in participating kavi sammelans and Mushayaras all over India. Vedios on my gazals and geets are also available on you tube. I am a teacher by profession and a poet by nature.
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अंचल सक्सेना की रचनात्मक पहचान किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। उनका लेखन जीवन को अनेक आयामों से गुज़रने के सफ़र का परिणाम है। क़ानून की कठोर वास्तविकताएँ, साहित्य की संवेदनशीलता और मनुष्य के मन को समझने की जिज्ञासा एक-दूसरे से संवाद करती हैं। उत्तर प्रदेश के फ़र्रुख़ाबाद से जुड़ी उनकी पहचान केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और भावनात्मक भी है, जिसकी छाप उनकी रचनाओं में सहज रूप से दिखाई देती है। उन्होंने विधि में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और कुछ वर्षों तक आपराधिक कानून के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य किया। न्यायालयों के भीतर और बाहर मनुष्य की पीड़ा, संघर्ष और टूटन को निकट से देखने का अनुभव उनके दृष्टिकोण को गहराई देता है। यही अनुभव आगे चलकर उनके लेखन की ज़मीन बना, जहाँ पात्र केवल कल्पना नहीं, बल्कि जीवन से जुड़े प्रतीत होते हैं। हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर अध्ययन ने उनकी भाषा और शिल्प को सुदृढ़ किया, लेकिन उनकी लेखनी का मूल स्रोत जीवन की अनुभूतियाँ हैं। अंचल सक्सेना अब तक चार पुस्तकों की रचना कर चुकी हैं और “प्रेम नगरी” व “बावजूद” नामक दो अन्य किताबों में अपनी रचनाओं के माध्यम से सहयोग कर चुकी हैं। उनकी तीसरी किताब और पहला कहानी संग्रह “चुटकी भर कहानी” इंक पब्लिकेशन के सहयोग से सन 2020 में प्रकाशित हुआ। जो साधारण-सी लगने वाली घटनाओं में छिपी भावनात्मक जटिलताओं को उजागर करता है। इन कहानियों की विशेषता उनका संयम और उनकी गहराई और कम शब्दों में अधिक कह जाने की क्षमता है।
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दिनेश कुशवाहा एक लेखक, वक्ता, स्टोरी टेलर, संपादक, फ़िज़िकल ट्रेनर, फ़िट्नेस एक्सपर्ट, भूतपूर्व राष्ट्रीय खिलाड़ी (ताईक्वांडो), तैराक और थेरेपिस्ट होने के अलावा एक गंभीर विचारक हैं... उनके कई रूप और कई व्यक्तित्व है। एक लेखक के तौर पर उन्होंने अलग-अलग विषयों पर आठ किताबें लिखी है, जिनमें सात प्रकाशित हैं और दो किताबों का अंग्रेजी भाषा में अनुवाद किया गया है। इसके अलावा - उन्हें हर दिन, हर पल, कुछ नया रचनात्मक करने व नई-नई विधा को सीखने में बेहद दिलचस्पी है। वहीं दूसरी ओर.. किताबों के साथ वक़्त गुज़ारना। फ़िटनेस, फ़ोटोग्राफ़ी, मार्शल आर्ट ट्रेनिंग, स्वीमिंग, क्रिएटिव ड्राइंग और डिज़ाइनिंग के अलावा खाना-पकाना, दोस्तों के साथ पार्टी करना और घुमक्कड़ी जैसे शौक पालना उनका मनपसंद विषय है।
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लालित्य ललित हिंदी व्यंग्य के समकालीन हस्ताक्षर हैं जो अपनी सोच से ज्यादा सक्रिय हैं, अखबारों में कॉलम तो लिखते ही हैं आकाशवाणी के कार्यक्रमों में भी श्रोताओं को उनकी व्यंग्य रचनाएं सुनाई पड़ती हैं. दूरदर्शन ने भी उनके लेखन पर लगभग आधे घंटे का कार्यक्रम बनाया, जो खासा चर्चा में रहा. अनेक विश्व विद्यालयों में उनके लेखन पर शौध चल रहे हैं, अनेक पोस्ट कास्ट कार्यक्रम उनके लेखन के संदर्भ में यू ट्यूब पर देखें जा सकते हैँ.
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मुकेश पोपली भारतीय स्टेट बैंक में 38 वर्ष सेवारत रहे, जिसमें वर्ष 2006 से 2019 तक राजभाषा अधिकारी के रूप में कार्य किया। इस दौरान बैंक की तिमाही गृह पत्रिका ‘हिंदी ज्ञानवेणी’ का सफल संपादन भी किया। वर्ष 2019 में बैंक सेवा से सेवानिवृत्ति पश्चात वह स्वतंत्र लेखन कार्य कर रहे हैं।
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डॉ. ज़ियाउर रहमान जाफ़री की गिनती हिंदी के समृद्ध ग़ज़ल आलोचकों में होती है. एक मजे हुए शायर के तौर पर भी आप काफ़ी प्रसिद्ध हैं. आलोचना और ग़ज़ल के अलावा बाल कविताओं की भी कई पुस्तकें प्रकाशित हैं. बिहार सरकार के अलावा देश भर के कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले हैं. जिसमें आपदा प्रबंधन पुरस्कार शाद अज़ीमाबाद सम्मान, यशपाल सम्मान आदि प्रमुख हैं. खुले दरीचे की ख़ुशबू,ख़ुशबू छू कर आई है, परवीन शाकिर की शायरी,परवीन शाकिर की लोकप्रिय ग़ज़लें,ग़ज़ल लेखन परम्परा और हिंदी ग़ज़ल का विकास आदि प्रमुख है. बाल कविताओं में चाँद हमारे मुट्ठी में है, आख़िर चाँद चमकता क्यों है, मैं आपी से नहीं बोलती काफ़ी चर्चित रही है.
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जन्म 1954 अब तक 4 उपन्यास, 3 कहानी-संग्रह, 1 व्यंग्य-संग्रह, 4 ग़ज़ल-संग्रह, 3 कविता-संग्रह, 1 गीत-संग्रह, 1 क्षणिका-संग्रह और कविताओं पर 1 समीक्षा-पुस्तक प्रकाशित। उपन्यास "इतिसिद्धम" की पाण्डुलिपि 1987 में वाणी प्रकाशन द्वारा "प्रेमचंद महेश पुरस्कार" से सम्मानित और पुरस्कृत तथा 1988 में प्रकाशित । इसके अतिरिक्त समय-समय पर अनेक साहित्यिक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत और सम्मानित। बाल-साहित्य लेखन में भी गतिशील। कुछ बाल-कविता/कहानी संकलनों में रचनाएँ संकलित। कक्षा-5 की एक पाठ्य-पुस्तक में चार कहानियाँ और एक कविता सम्मिलित। देश भर की प्रतिष्ठित 150 से अधिक पत्र-पत्रिकाओं में अनेक बार असंख्य रचनाएँ प्रकाशित। दो दर्जन से अधिक नेट-पत्रिकाओं में भी रचनाएँ प्रकाशित
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Laxmi Kant Shukkla is an Indian author and storyteller with a deep passion for epic narratives rooted in history, mythology, and royal intrigue. His writing blends ancient civilizations, fictional kingdoms, and intense human drama, creating richly imagined worlds that resonate with contemporary audiences. With a strong inclination toward cinematic storytelling, Laxmi Kant’s work naturally lends itself to visual adaptation, particularly in the genres of historical fiction, mythic thrillers, and grand royal sagas. His novel Devalika reflects his vision of crafting layered characters, powerful conflicts, and emotionally driven plots set against majestic, timeless backdrops. Driven by the dream of seeing Indian historical and mythological stories presented on a global OTT stage, Laxmi Kant Shukkla continues to develop original narratives with the potential to evolve into web series and feature films. His work aims to revive the grandeur of ancient storytelling while connecting it to modern sensibilities.
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सर्वप्रथम 1991 में लिखना आरंभ किया, अक्टूबर 1992 में पहली कहानी ‘एक और निर्मला’ मनोरमा में प्रकाशित हुई। तत्पश्चात् अनेकानेक कहानियाँ एवं लेख विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित, कहानी ‘ये माँ की गोद नहीं है’ पर अमृतसर खालसा विश्वविद्यालय की छात्रा द्वारा शोध प्रबंध। कहानी गोष्ठियों में भी कई कहानी चर्चित हुई, गद्य की लगभग सभी विधाओं में लेखन काव्य गोष्ठियों में काव्य-पाठ, आकाशवाणी प्रयागराज से भेंटवार्ता का प्रसारण, अनेक साहित्यिक संस्थाओं द्वारा राष्ट्रीय स्तर का सम्मान, साहित्य भूषण, मानद आदि उपाधियाँ प्राप्त, हिन्दुस्तानी एकेडमी प्रयागराज द्वारा सम्मानित। ऑनलाइन समीक्षक, कहानी, कविता-पाठ। अब तक 21 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और कुछ प्रकाशन की प्रक्रिया में हैं, कुछ पर काम चल रहा है। हिन्दुस्तान समाचार-पत्र में महिला दिवस पर प्रयागराज के विभिन्न क्षेत्रों में अग्रणी महिलाओं में नाम। अखिल भारतीय हिन्दी महासभा के प्रयागराज प्रांत की उपाध्यक्ष शहर समता विचार-मंच की संरक्षक तथा शलभ संस्था की उपाध्यक्ष, समन्वय, सुरभि संस्था की सदस्य।
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मेरठ निवासी लेखिका पूनम मनु समकालीन हिंदी कथा साहित्य में एक सामाजिक यथार्थवादी और संवेदनशील कथाकार के रूप में अपनी अलग पहचान रखती हैं। उनकी कहानियों की जड़ें समाज की उसी मिट्टी में हैं, जहाँ सामान्य मनुष्य रोज़मर्रा के संघर्षों, रिश्तों की जटिलताओं और अपने भीतर चलने वाले द्वंद्वों के साथ जीवन जीता है। वे स्त्री अनुभवों को किसी वैचारिक घोषणा की तरह नहीं, बल्कि उनके नैसर्गिक गुणों—संवेदना, जिजीविषा, विवशता और आत्मसम्मान के साथ प्रस्तुत करती हैं। उनका लेखन समाज को बाहर से देखने का प्रयास नहीं करता, बल्कि भीतर से महसूस करता है। इसलिए उनकी कहानियों में स्त्री केवल पीड़ित या विद्रोही नहीं, बल्कि सोचने, निर्णय लेने और परिस्थितियों से जूझने वाली एक संपूर्ण मनुष्य के रूप में उपस्थित होती है। पारिवारिक संबंध, सामाजिक दबाव, आर्थिक असमानता, पुरुष वर्चस्व, अकेलापन, उम्मीद और टूटन—ये सभी तत्व उनकी कथा-भूमि में स्वाभाविक रूप से समाए हुए मिलते हैं। पूनम मनु की कहानियाँ किसी एक विषय तक सीमित नहीं रहतीं। वे समाज, रिश्ते, संघर्ष और स्त्री अनुभव, इन सभी आयामों को समान गंभीरता से छूती हैं। उनका कथ्य सादा होते हुए भी गहरे अर्थों से भरा होता है। भाषा में अनावश्यक अलंकरण नहीं, बल्कि ऐसी सहजता है जो पाठक को कथा के भीतर खींच लेती है। संवादों और स्थितियों में जीवन की वास्तविक धड़कन सुनाई देती है। उनका लेखन यह विश्वास जगाता है कि साहित्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि संवेदनशील मनुष्यता का दस्तावेज़ भी है। वे बिना उपदेश दिए, बिना शोर मचाए, पाठक को सोचने के लिए विवश करती हैं। यही कारण है कि उनकी कहानियाँ पढ़ने के बाद भी मन में देर तक ठहरती हैं और पाठक अपने आसपास के समाज को नए दृष्टिकोण से देखने लगता है।
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